Thursday, November 11, 2010

सरज़मीन ऐ वतन स्वागतम सवागतम

सर ज़मीन ऐ वतन
स्वागतम सवागतम
स्वागतम सवागतम

आन तेरी SALAMAT RAHE मंगलम -
ओ शुभम ओ शुभम
ओ शुभम ओ शुभम
सरज़मीन ऐ वतन
स्वागतम सवागतम
सवागतम सवागतम

तेरी मेन्ह्मान नवाजी के ज़ेर ऐ असर,
शेहर ऐ बक्का मैं रब KA बना एक घर ,
ब्येत ऐ मामूर की तर्ज़ पर मोतबर
रुख करे जिसका BANDAA बने सजदा गर,
सींच के तुझ से खिला अम्बियाई निजाम ,
तेरा रुतबा हमारे लिये मोहतरम ,

स्वागतम स्वागतम ,
स्वागतम स्वागतम ,
सर ज़मीन ऐ वतन
मर्हबन मर्हबन ,
सवागतम सवागतम
आन तेरी SLAMAT RAHE MANGALAM -
ओ शुभम ओ शुभामो
शुभाम् ओ शुभम
सर ज़मीन ऐ वतनस्वागतम
स स्वागतम स्वागतम

तेरी खुशबु तेरे सब्ज़ तेरा गगन ,

तेरी नाघ्मा निगारी की पहचान हैं ,

तेरु नदियाँ तेरे मौसमी पेच ओ ख़म,

तुझको रब का दिया एक इनाम हैं ,

JAB BHI TERI WAFA KA HAWALA MILA,

तेरे TUKRON KO AEK JAAN PHIR डैन गे हम

ओ शुभम ओ शुभम

O SHUBHAM O SHUBHAM,

SAR ZAMEEN AE WATAN

स्वागतम स्वागतम,

मर्हबन मर्हबन

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